Tuesday, October 20th, 2026

एक महाशक्ति के ध्वस्त होने का गोर्बाचेव को प्रत्यक्ष अनुभव: विशेषज्ञ

मास्को
मिखाइल गोर्बाचेव जब सोवियत संघ की कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव और देश के राष्ट्रपति बने, तब सोवियत संघ महाशक्ति और अमेरिका का प्रतिद्वंद्वी था। लेकिन उनके राष्ट्रपति रहते ही 1991 में सोवियत संघ बिखर गया। इसलिए अमेरिका की हाल की घटनाओं के बारे में उनकी टिप्पणी को दुनिया भर में ध्यान से सुना गया है। विश्लेषकों का कहना है कि एक महाशक्ति के ध्वस्त होने का गोर्बाचेव को प्रत्यक्ष अनुभव है। इसलिए अमेरिका को भी उनकी बातों को गंभीरता से लेना चाहिए।

छह जनवरी को वाशिंगटन में कैपिटल हिल पर ट्रंप समर्थक भीड़ के हमले के बारे में गोर्बाचेव ने कहा है कि ये घटना इस बात का संकेत है कि अमेरिका के मौजूदा रूप में बने रह पाने के लिए खतरा पैदा हो गया है। 89 वर्षीय पूर्व सोवियत नेता ने इंटरफैक्स न्यूज एजेंसी को शुक्रवार को दिए एक इंटरव्यू में ये टिप्पणी की। उन्होंने कहा- 'इस घटना ने संयुक्त राज्य अमेरिका के भविष्य पर सवाल खड़ा कर दिया है।' गोर्बाचेव ने कहा कि यह साफ है कि हमले की योजना पहले से बनाई गई थी। यह भी साफ है कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

गोर्बाचेव ने 1985 में सोवियत संघ का नेता बनने के बाद खुलापन लाने और पुनर्रचना की योजनाएं- ग्लासनोस्त और पेरेस्त्रोइका- शुरू की थीं। उससे कम्युनिस्ट पार्टी के कुछ नेताओं ने 1991 में उनका तख्ता पलटने की कोशिश की थी। उन नेताओं का आरोप था कि गोर्बाचेव पश्चिमी देशों की तरफ झुक गए हैं। गोर्बाचेव पर ‘अमेरिका का एजेंट’ होने के आरोप भी लगे थे। ताजा इंटरव्यू में गोर्बाचेव ने कहा- कुछ समय लगेगा, लेकिन हम समझ जाएंगे कि आखिर ये (कैपिटल हिल पर हमला) क्यों हुआ।

गोर्बाचेव ने 1987 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन के साथ आईएनएफ यानी इंटर रेंज न्यूक्लीलियर ट्रीटी पर दस्तखत किए थे। तब इसे परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम समझा गया था। इंटरव्यू में उन्होंने एक बार फिर से हथियारों की होड़ छिड़ने की संभावना और अमेरिका और रूस के मौजूदा संबंध पर भी अपनी राय जताई। ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में तत्कालीन सोवियत संघ से निरस्त्रीकरण के लिए हुए कई समझौतों से अमेरिका को अलग कर लिया था।

ट्रंप प्रशासन ने पिछले चार साल में कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों में भी अमेरिका की भागीदारी घटा दी। इस दौरान यूनेस्को और मानवाधिकार काउंसिल से अमेरिका बाहर निकल गया। आईएनएफ संधि से भी वह अलग हट गया। अब सत्ता संभाल रहे जो बाइडन प्रशासन से उम्मीद है कि वह अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रति सकारात्मक नजरिया अपनाएगा। लेकिन बाइडन और उनकी डेमोक्रेटिक पार्टी का रूस के प्रति रुख सख्त है। इसलिए रूस के साथ समझौतों पर बाइडन प्रशासन का क्या रुख होगा, इसको लेकर अभी कयास लगाए जा रहे हैँ।

गोर्बाचेव ने ये भी कहा कि नई पीढ़ी हथियारों की होड़ को स्वीकार नहीं करेगी। लोग युद्ध नहीं, एकताबद्ध होना चाहते हैँ। नेताओँ के लिए इसके लिए रास्ता तलाश करना होगा। उन्हें सभी तरह के हथियारों के खात्मे के लिए नई संधियां करनी होंगी। हमें उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। हमें नई पीढ़ी पर भरोसा रखना चाहिए।

 

#मिखाइल गोर्बाचेव

Source : Agency

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